अजमेर।  चौदह साल से कम उम्र की मासूम बालिकाओं के साथ होने वाली अश्लील हरकत या दुराचार जैसी घटना में उनके निकट संबंधियों और रिश्तेदारों ने ही सितम ढहा। आलम यह है कि चार साल में मासूम बालिकाओं की अस्मत के साथ खिलवाड़ करने वाली घटनाओं में तेजी से वृद्धि हुई है। दुष्कर्म व दुष्कर्म के प्रयास के ज्यादातर मामलों में आरोपित पीडि़ताओं के इर्दगिर्द होता है। मासूम बालिकाओं से बढ़ती दुराचार की वारदातें सरकार, समाज व पुलिस के लिए चिंता का कारण बनी हुई है।लैंगिक उत्पीडऩ से बच्चों के संरक्षण का अधिनियम 2012(पोक्सो एक्ट) लागू होने के बाद अजमेर जिले में नाबालिग के साथ होने वाले अत्याचार की काली इबारत सामने आई। जहां साल 2012 में जिले में एक मुकदमा दर्ज हुआ। वहीं दूसरे साल 2013 में 64 प्रकरण दर्ज हो गए। इसमें सामूहिक बलात्कार के भी मामले सामने आए।

दर्ज प्रकरणों में से सिर्फ 2 पर अंतिम प्रतिवेदन (एफआर) पेश किया। बाकि 62 मामले में गिरफ्तारी के साथ पुलिस ने चालान भी पेश कर दिया। साल 2014 में 102 प्रकरण दर्ज हुए लेकिन संबंधित थाना पुलिस 84 में चालान पेश कर सकी। बाकी 17 में विभिन्न कारणों से एफआर लगा दी गई। हालांकि 2015 में पोक्सो एक्ट के 90 प्रकरण दर्ज हुए। इसमें से 69 में चालान और शेष 16 में एफआरलगा दी गई, जबकि 2016 के तीन माह में पोक्सो एक्ट के तीन प्रकरण दर्ज हो चुके हैं।

भगा ले जाने के मामले ज्यादा

जिले में नाबालिग व स्कूली छात्राओं को भगा ले जाने के मामले ज्यादा सामने आए। जानकारों के मुताबिक आरोपित कच्ची उम्र में नाबालिग को मोहब्बत के जाल में फांसकर प्यार भरी जिन्दगी का सब्जबाग दिखाता है। नतीजतन कुछ दिन बाद ही जमीनी हकीकत से रू-ब-रू होने पर किशोरी को गलती का एहसास हो जाता है। परिजन के पास पहुंचते ही वह कानूनी कार्रवाई का सहारा अंजाम देते हैं।

पुलिस के आंकड़ों में सच आया सामने

2012 01 02 01 – –

2013 64 95 62 02 –

2014 102 123 84 17 01

पुलिस के आंकड़ों में सच आया सामने

2015 90 94 69 16 05

2016 03 02 – – –

दस से 13 साल की बालिकाओं की ओर से दर्ज प्रकरण में पीडि़ता के नाते रिश्तेदार व निकट संबंधी लोगों की लिप्तता रहती है। बालिकाओं के साथ होने वाले अत्याचार की रोकथाम के लिए पुलिस हमेशा प्रयासरत है। आरोपितों की गिरफ्तार पुलिस के आंकड़ों में सच आया सामनेकरके पीडि़ता और उसके परिजन को राहत पहुंचाने का प्रयास किया जाता है।