अनुभवी एवं युवाओं के साथ ही पहली बार विशेष वर्गों को मिला पर्याप्त प्रतिनिधित्व

लॉयन न्यूज, उदयपुर। राजस्थान साहित्य अकादमी की 19वीं सरस्वती सभा का सोमवार को अकादमी में आहुत बैठक में विधिवत गठन किया गया। इस सरस्वती सभा में विभिन्न क्षेत्रों, वर्गों के पर्याप्त प्रतिनिधित्व के साथ-साथ अनुभवी एवं युवाओं के पर्याप्त प्रतिनिधित्व को भी ध्यान में रखा गया।


अकादमी सचिव डॉ. बसंत सिंह सोलंकी ने बताया कि राजस्थान सरकार द्वारा नवनियुक्त अध्यक्ष डॉ. दुलाराम सहारण की अध्यक्षता में आहुत बैठक में सरकार द्वारा बतौर विशिष्ट साहित्यकार नामित सदस्य मीठानाथ मीठेश निर्मोही, जोधपुर, किशन दाधीच उदयपुर तथा वित्त विभाग बतौर प्रतिनिधि कोषाधिकारी शहर सीमा गीतेश, कोषाध्यक्ष कमल कुमार शर्मा की भागीदारी रही।


अकादमी सचिव सोलंकी के अनुसार नवगठित सरस्वती सभा में महेंद्र नेह कोटा, डॉ. मंजु चतुर्वेदी उदयपुर, डॉ. हेमेंद्र चंडालिया उदयपुर, थावरचंद डामोर खैरवाड़ा, डॉ. मदन सैनी श्रीडूंगरगढ़, डॉ. गंगासहाय मीणा सवाई माधोपुर, डॉ. संदेश त्यागी श्रीगंगानगर, तसनीम खान जयपुर, उम्मेद गोठवाल चूरू, डॉ. सुनीता घोघरा डूंगरपुर, राजूराम बिजारणिया लूणकरणसर, डॉ. मनीषा डागा जोधपुर, सरिता भारत अलवर, प्रवेश परदेशी प्रतापगढ, डॉ. कालूराम परिहार जोधपुर को संविधान की धारा 15 (5) के तहत बतौर सदस्य मनोनयन किया गया है। वहीं अकादमी संविधान की धारा 13 (4) के तहत अंतर प्रांतीय कुमार साहित्य परिषद जोधपुर से डॉ. भावेंद्र शरद जैन, श्रीहिंदी साहित्य संसद भरतपुर से नरेंद्र निर्मल एवं साहित्य संगम अलवर से रामानंद राठी का बतौर संस्था प्रतिनिधि मनोनयन किया गया है।


उल्लेखनीय है कि खैरवाड़ा से थावरचंद डामोर एवं डूंगरपुर से डॉ. सुनीता घोघरा आदिवासी समुदाय के भील वर्ग से संबंध रखते हैं वहीं अलवर से नामित सरिता भारत विमुक्त घुमंतु समुदाय नट बजानिया वर्ग से संबंध रखती हैं। 1958 में स्थापित राजस्थान साहित्य अकादमी में संभवत: भील एवं नट वर्ग को पहली बार प्रतिनिधत्व मिला है, वहीं अनुभवी एवं युवाओं का सुंदर मिश्रण भी हुआ है।