नई दिल्ली। अवैध हथियार रखने के मामले में सजा पूरी कर फरवरी में रिहा हुए संजय दत्त ने एक बार फिर जेल के दिनों को याद किया है। संजय ने कहा कि पुणे जेल में बहुत मक्खियां रहती थीं। चाहें बाल हों या कपड़े, हर जगह मक्खियां चिपकी नजर आती थीं। संजय के मुताबिक, कई बार तो दाल में भी मक्खी मिलती थी। मैं मक्खी निकालकर दाल पी जाता था। एक साथी ने इसकी वजह पूछी तो मैंने कहा- दाल में प्रोटीन होता है।
और क्या बताया संजय ने जेल के दिनों के बारे में…..
– दिल्ली में एक प्रोग्राम के दौरान संजय ने लोगों से कई बातें पहली बार शेयर कीं। इनमें से ज्यादातर फैमिली और प्रिजन से जुड़ी हुईं थीं।
– संजय के मुताबिक- ”जब मैं पहली बार जेल गया तो पापा और बहन प्रिया बेहद दुखी थे। राखी के दिन प्रिया जेल में मिलने आई तो मैंने उसे वो कूपन गिफ्ट किए जो जेल में काम करने के बदले मिलते थे।”
– दत्त के मुताबिक- ”जेल में मक्खी वाली दाल पी जाता था। आज घर में पत्नी जब कभी दाल बनाती है तो मैं शिकायत नहीं कर सकता।”
संजय दत्त ने और क्या अहम बातें बताईं?
– संजय ने कहा, “बच्चों को मेरे जेल जाने के बारे में जानकारी नहीं थी। उनसे मैंने कहा था कि मैं किसी माउंटेन एरिया में शूटिंग कर रहा हूं। मान्यता से कह रखा कि वो बच्चों को कभी जेल लेकर न आए। मैं नहीं चाहता था कि बच्चे मुझे फटे कपड़ों और टोपी में देखें। महीने में दो बार उनसे फोन पर बात करता था।”
– “23 साल पहले मुझे नहीं पता था कि टाडा कानून क्या है। जब पहली बार मुझे सजा सुनाई गई तब मैं मॉरिशस में शूटिंग कर रहा था। प्रिया ने फोन पर मुझे सजा के बारे में बताया। मुंबई वापस आया तो एयरपोर्ट पर हजारों पुलिस वाले मेरी तरफ बंदूक तानकर खड़े थे, जैसे मैं ओसामा बिन लादेन हूं।”
– “जिंदगी आसान हो जाती है, अगर इच्छाएं खत्म हो जाएं। इसलिए जेल में कोई उम्मीद नहीं रखी। जेल में गीता भी पढ़ी और कुरान भी। वहां बाथरूम के सामने ही मंदिर था। लेकिन कोई फर्क नहीं पड़ता क्योंकि भगवान तो दिल में रहता है।”
– “जब जेल गया तो मेरा वजन 110 किलोग्राम था। क्योंकि शराब बहुत पीता था। एक दिन लगा कि पेट कुछ ज्यादा ही निकल आया है। फिर खुद से कहा कि शर्म आनी चाहिए इस हालत पर। यार्ड में ही रनिंग करता और बाल्टियों से वेटलिफ्टिंग करता। कौन कहता है कि सिर्फ जिम जाने से ही फिटनेस आती है। दीवार पर तब तक मुक्के मारता जब तक रिस्ट नहीं सूज जातीं थीं।”
 “दोस्तों से कुछ लेने की उम्मीद नहीं रखता”
 – संजय ने आगे कहा- मैं दोस्तों से कोई उम्मीद नहीं रखता। हो सकता है बुरे वक्त में उनके साथ खड़ा हो जाऊं, लेकिन अच्छे वक्त में न जा पाउं। जेल में था तो कभी ये उम्मीद नहीं करता था कि कोई मुझसे मिलने आए या मेरे घर जाकर वहां के हालात देखे। अब कोई मिलने आता है तो अच्छा लगता है।
– दत्त ने आगे कहा- दुनिया में एेसा कोई ड्रग नहीं है जो मैंने नहीं लिया हो। पापा इलाज के लिए अमेरिका ले गए तो डॉक्टर ने एक लिस्ट दी। उसने कहा- जो ड्रग लेते हो उसके आगे टिक कर दो। मैंने सब जगह कर दिए।