• अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक रहते फिट। व्यस्तता के बाद भी निकालते परिवार के लिए समय।अजमेर।  म्यूजिक दिल और दिमाग को सुकून पहुंचाता है। भागदौड़ भरी जिंदगी और सरकारी नौकरी की व्यस्तता के चलते भले ही म्यूजिक के लिए समय निकालना मुश्किल हो, लेकिन कुछ समय निकाल कर म्यूजिक जरूर सुनना चाहिए। इससे दिलो दिमाग में ताजगी महसूस होगी। यह कहना है अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (शहर) अवनीशकुमार शर्मा का। वे दिनभर कामकाज में व्यस्त रहते हैं, लेकिन ऑफिस के लिए तैयार होने के दौरान ही रोजाना 20-25 मिनट म्यूजिक सुनते हैं। उन्हें मुकेश और मोहम्मद रफी के सदाबाहर गीत सुनना पसंद है।

    police36 की उम्र में सीखी तैराकी

    एएसपी शर्मा बताते हैं कि बचपन में वह स्वीमिंग (तैराकी) सीखना चाहते थे, लेकिन मौका नहीं मिला। फिर भी सीखने की ललक कम नहीं हुई। छत्तीस साल की उम्र में राजस्थान पुलिस अकादमी में 10 माह के कार्यकाल के दौरान उन्होंने स्वीमिंग और 38 साल की उम्र में टेनिस खेलना सीखा। अब जब भी अवसर मिलता है स्वीमिंग करते हैं और टेनिस खेलते हैं। पुलिस की व्यस्तता भरी ड्यूटी में बच्चों और परिवार को समय कम दे पाते हैं, लेकिन जब भी समय मिलता है बेटियों को मैथ्स और साइंस पढ़ाते हैं। उन्होंने राजस्थान यूनिवर्सिटी से भौतिक विज्ञान में एमएससी व एलएलबी की पढ़ाई की है। उनका मानना है कि लगातार सीखने से व्यक्तित्व में निखार आता है।

    फिटनेस के लिए डेढ़ घंटाpolice

    शर्मा सुबह 5.30 बजे सोकर जाग जाते हैं और सबसे पहले ताम्बे के गिलास में पानी पीते हैं। सुबह 6 से 7.30 बजे तक रन एंड वॉक, योगा व साइक्लिंग करते हैं। इसमें पचास मिनट रन एंड वॉक के होते हैं। कम से कम 5 किमी की जॉगिंग करते हैं। दफ्तर जाने से पहले अल्पाहार में एक फल, दलिया या ओट्स और दूध लेते हैं।

    एक किताब हमेशा साथ

    शर्मा पढऩे के भी शौकीन हैं और एक न एक किताब हमेशा अपने साथ रखते हैं जिसे फुर्सत मिलने पर पढ़ते हैं। रात को सोने से पहले भी किसी किताब के दो पन्ने जरूर पढ़ते हैं। वे राजस्थान पुलिस अकादमी कीpolice लाइब्रेरी के भी नियमित सदस्य हैं। उनका मानना है कि किताब पढऩे से सोच विस्तृत होती है, नए विचार आते हैं। ‘राग दरबारीÓ ‘मृत्युंजयÓ और ‘द अलकेमिस्टÓ उनकी पसंदीदा पुस्तकें हैं।

    पुलिस सच्ची सेवा

    शर्मा ने बताया कि जब एक बुजुर्ग ने न्याय मिलने पर उनके पैर छूने का प्रयास किया तो लगा पुलिस ही सच्ची सेवा है। शर्मा ने बताया कि 25 साल की उम्र में 1998 में पुलिस की नौकरी ज्वॉइन की। इससे पूर्व 1996 में सेना में सैकंड लेफ्टिनेंट और फिर केबिनेट सचिवालय में चयन हुआ लेकिन नौकरी ज्वॉइन नहीं की।

    परिवार देता है ताकत

    मूलत: अलवर जिले के कठूमर के निकट टीटपुरी के रहने वाले शर्मा के पिता प्रभुदयाल शर्मा जिला न्यायाधीश के पद से सेवानिवृत्त है जबकि मां और पत्नी गृहिणी हैं। बड़े भाई जयपुर में वकील हैं। बेटियां अनविता और शिरिन है। शर्मा का मानना है कि हर व्यक्ति के जीवन ने संघर्ष का दौर आता है लेकिन परिवार के साथ रहने से हमेशा शक्ति की अनुभूति होती है। पुराने संंबंध हमेशा ऊर्जा देते हैं इसलिए वे आज भी अपने स्कूल के मित्रों से जुड़ाव रखते हैं।